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फ़ाइट ऑर फ़्लाइट

फ़ाइट ऑर फ़्लाइट रेस्पॉन्स (डटकर मुक़ाबला करना या पीछे हटना)

एंग्ज़ाइटी महसूस करना हमारे शरीर के लिए काफ़ी आम बात है, हम सब कभी न कभी अपने जीवन में इसे महसूस करते हैं। यह मानसिक तनाव के लिए, खुद को तैयार करने का, हमारे शरीर और मस्तिष्क का एक तरीक़ा (मैकेनिज़्म) है।

किसी तरह के डर का एहसास होने पर हमारा मस्तिष्क, फ़ाइट ऑर फ़्लाइट रेस्पॉन्स की प्रक्रिया को अपनाता है। इसमें आपका मस्तिष्क या तो वहां से भागने और छिपने का चुनाव करता है या फिर लड़ने का। कुछ मामलों में आप पूरी तरह से सुन्न हो जाते हैं। इसकी मदद से हम शारीरिक या मानसिक तौर पर कोई प्रतिक्रिया दे पाते हैं, जिससे हमें उस वक़्त कोई फ़ैसला लेने में आसानी होती है।

मानव विकास के इतिहास की शुरुआत से ही मनुष्यों का सामना हर तरह के ख़तरे से होता रहा। उदाहरण के लिए,शिकार करने या भोजन की तलाश के दौरान शेर से सामना।

शेर का अचानक से आना।

अब उस इंसान को या तो उससे लड़ना पड़ेगा या फिर वहां से भागना।

फ़ाइट ऑर फ़्लाइट

इसके लिए शरीर को कुछ और हिम्मत की ज़रूरत होती है. इसलिए, मस्तिष्क में कॉर्टिसोल और एड्रेनलिन नाम के दो हार्मोन का स्राव होने लगता है|

इसे स्ट्रेस हार्मोन भी कहते हैं| यह हारमोन हमारे शरीर में अलग-अलग रिएक्शन करने लगता है जिससे शरीर अलग बर्ताव करता है।

शरीर को कुछ देर के लिए एक ख़ास ऊर्जा का एहसास होने लगता है, जिससे अब आपका मस्तिष्क अपने फ़ैसले तेज़ी से लेता है। इसमें या तो वहां भागने का चुनाव करता है या फिर लड़ने का।