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एग्ज़ाम एंग्ज़ाइटी

एग्ज़ाम एंग्ज़ाइटी (परीक्षा की चिंता)

हम सब कभी न कभी एग्ज़ाम एंग्ज़ाइटी के शिकार हुए हैं। परीक्षा की यह चिंता हमें याद दिलाती है कि उस विषय के लिए हम कितने तैयार हैं और हमें कितने रिवीजन (अभ्यास) की ज़रूरत है। हालांकि, परीक्षा से जुड़ी यह चिंता अगर बढ़ जाए, तो यह हमारी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी पर असर दिखा सकती है। नतीजतन, इससे हम परीक्षाओं की तैयारी ठीक से नहीं कर पाते और बेहतर नतीजे नहीं मिलते।

एग्ज़ाम एंग्ज़ाइटी के लक्षण

एग्ज़ाम एंग्ज़ाइटी के लक्षणों को कम करने में हम क्या कर सकते हैं

परीक्षाओं के दौरान हमारा चिंतित होना लाज़मी है। हालांकि, जब चिंता को मैनेज करना मुश्किल हो और उसका असर आपकी तैयारी पर पड़ने लगे, तो मानकर चलें कि आप एग्ज़ाम एंग्ज़ाइटी से जूझ रहे हैं। यह रहे कुछ तरीक़े जिन्हे अपनाकर आप अपनी चिंता को कम करके, बेहतर ढंग से परीक्षाओं की तैयारी कर सकते हैं।

अपनी पढ़ाई को मैनेज करें

पढ़ने-लिखने के समय को ठीक से मैनेज करके आप परीक्षाओं को लेकर होने वाली चिंता (एग्ज़ाम एंग्ज़ाइटी) से निपट सकते हैं। ज़रूरी नहीं कि एग्ज़ाम एंग्ज़ाइटी को कम करने के लिए, आपके माता-पिता या भाई-बहनों की अपनाई गई तकनीक या रणनीति आपके काम भी आए। ऐसे में ज़रूरी है कि आप एंग्ज़ाइटी को कम करने और पढ़ाई पर ध्यान लगाने के लिए अलग-अलग तकनीक अपनाते रहें।

अपनी पढ़ाई का शेड्यूल अपनी ऊर्जा के हिसाब से बनाएं। अगर आप रात में जागकर पढ़ना पसंद करते हैं और ज़्यादा एलर्ट रहते हैं, तो शाम के समय ही, वक़्त से ही पढ़ना जारी रखें। अगर आप किसी तरह का संगीत सुनते हुए पढ़ना पसंद करते हैं, तो अपनी पसंद की प्लेलिस्ट बना सकते हैं। कुछ लोग बोल-बोलकर पढ़ना पसंद करते हैं, इससे उनके लिए चीज़ों को याद रखना आसान होता है। कुछ लोग नोट्स बनाते हैं, दोस्तों के साथ मिलकर पढ़ना पसंद करते हैं। ऐसे में कोशिश उस तरीक़े को अपनाने की करें जो आपके मनमुताबिक़ हो और फ़ायदेमंद भी।

ये रहे कुछ तरीक़े जिनसे आप अपने समय के हिसाब से अपने लक्ष्य को तय और हासिल कर सकते हैं:

समय का ठीक तरह से प्रबंधन

किसी परीक्षा की तैयारी के दौरान सबसे चुनौतीपूर्ण काम, इन बातों का ख़याल रखना है:
क्या आप छह घंटे या इससे ज़्यादा की नींद ले पा रहे हैं?
क्या आप दिन में तीन दफ़ा ठीक से खाना खा रहे हैं?
क्या आप पढ़ाई के दौरान ज़रूरी ब्रेक ले रहे हैं?

ऊपर बताई गई बातें काफ़ी ज़रूरी हैं, जिसके लिए आपको अपना समय तय करना चाहिए। दिमाग़ चीज़ों को याद रख सके इसके लिए ज़रूरी है कि आप पेट भर कर खाएं और अच्छी नींद लें। समय-समय पर पढ़ाई से ब्रेक लेने पर आप अपने दिमाग़ को थोड़ा आराम देते हैं, ताकि आपका शरीर और ज़हन लम्बे समय से एक ही जगह पर बैठकर न थके।

ब्रेक के दौरान दिमाग़ को ताज़गी का एहसास कराएं- दोस्त को फ़ोन करें, अपनी पसंद की कोई हल्की-फुल्की गेम खेलें या कोई टीवी सीरियल या वेब-सीरीज़ देखें।

वे काम के तरीक़े जिनसे आप अपनी पढ़ाई के समय को मैनेज कर सकते हैं

पोमोडोरो एक्सरसाइज़

उन लक्ष्यों की लिस्ट बनाएं जिन्हें आप पूरा करना चाहते हैं [अध्याय, अध्याय के पेजों की संख्या या कोई ख़ास टॉपिक या प्रॉब्लम।

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मदद माँगना

अगर आप एग्ज़ाम को लेकर चिंतित हैं और एंग्ज़ाइटी महसूस कर रहे हैं, तो इन तरीक़ों को अपनाएं:

अपने से किसी बड़े व्यक्ति से बात करें

अपने से किसी बड़े व्यक्ति (जैसे, आपके अभिभावक, परिवार का कोई सदस्य, भाई-बहन, कॉलेज में कोई सीनियर या टीचर) से बात करें और उनसे जानें कि उन्होंने एग्ज़ाम एंग्ज़ाइटी का मुक़ाबला कैसे किया। भले ही उन्होंने आपसे कम चिंता मसहूस की हो, लेकिन हो सकता है कि वे आपकी कोई मदद कर सकें।

अपनी ख़ास बातों और अपनी क़ाबिलियत को पहचानें

अपनी ख़ास बातों और अपनी क़ाबिलियत को पहचानें: परीक्षाओं से जुड़ी चिंता से आपको अपनी क़ाबिलियत पर शक हो सकता है, जिससे ख़ुद को कमतर आकने की भावना पैदा होती है। ऐसे में आपको अपने परिवार, भाई-बहन, दोस्तों से बात करनी चाहिए, ताकि आपको एक नया दृष्टिकोण मिले और आप अपनी ताकत पहचान सकें।

अपने साथियों से बात करें

हो सकता है कि आपकी क्लास में साथ पढ़ने वाले कुछ और लोग या बाक़ी साथी भी इसी तरह की चिंता महसूस कर रहे हों। अपनी एंग्ज़ाइटी को लेकर बात करने से न सिर्फ़ आपको हल्का महसूस होगा, बल्कि कुछ चिंताओं को लेकर आपकी सोच थोड़ी और बेहतर होगी।

हेल्पलाइन पर कॉल करें

‘मन टॉक्स’ में, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पेशेवर साथी इसी तरह की स्थिति के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किए गए हैं। अगर आप एग्ज़ाम को लेकर चिंतित हैं और एंग्ज़ाइटी महसूस कर रहे हैं, तो हमारी हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें।

माता-पिता / अभिभावक क्या कर सकते हैं?

बच्चे का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहे, इस बात का ख़्याल रखने में माता-पिता की भूमिका काफ़ी अहम होती है। यहां कुछ तरीके दिए गए हैं, जिनसे आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि आपका बच्चा परीक्षा की चिंता से परेशान न हो:

नंबरों पर ज़रूरत से ज़्यादा ज़ोर न दें

परीक्षाएं और टेस्ट, बच्चों ने जो सीखा है उसे अमल में लाने के लिए होती है। बच्चों से बहुत अधिक उम्मीद रखने से आप उनकी चिंताओं में इज़ाफ़ा करके, उनकी एंग्ज़ाइटी बढ़ा सकते हैं। इससे उनके प्रदर्शन पर भी असर पड़ सकता है।

‘हमेशा काम, नो आराम’ के मंत्र से परहेज़ करें

हमारे मस्तिष्क को आराम और नींद की आवश्यकता होती है, ताकि सूचनाओं को याद रखना मुमकिन हो। बच्चे को अध्ययन के दौरान ब्रेक लेते रहने दें, ताकि वे ख़ुद को ज़रूरत से ज़्यादा जानकारी से भरा हुआ मसहूस न करें।

बातचीत के दरवाज़े हमेशा खुले रखें

अपने बच्चे से पूछें कि उन्हें अपनी परीक्षाओं की तैयारी में किन चीज़ों की आवश्यकता है। क्या उन्हें फलों की ज़रूरत है या अपनी समय सारिणी बनाने के लिए, उन्हें कोई ख़ास माहौल चाहिए? बच्चों के साथ संचार के सभी रास्ते खुले रखें, ताकि आप उनकी ज़रूरतें पूरी कर सकें। साथ ही,उन्हें एहसास कराएं कि अगर वे ख़ुद को थोड़ा परेशान और चिंता महसूस कर रहे हैं, तो वे आपसे इसके बारे में बात कर सकते हैं।

उन्हें इस बात का एहसास दिलाने की कोशिश करें कि चिंता या इससे जुड़ी भावनाओं को महसूस करना एक सामान्य प्रक्रिया है। साथ ही, इस बात की भी तसल्ली दें कि आप हर हालात में उनका साथ देने के लिए वहां मौजूद रहेंगे। अगर आप उन्हें परीक्षा को लेकर बहुत चिंतित महसूस करें, तो अपने बच्चे के साथ गहरी साँस लेने का अभ्यास करें। आप उनके साथ कई तरह की दूसरी गतिविधियां (जैसे-विंड डाउन/ काम डाउन) भी कर सकते हैं, ताकि उनके मानसिक तनाव को कम किया जा सके।